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Monday, November 29, 2021

सब ले लो

 तुम सब ले लो मुझसे 
मेरा कुछ भी तो नहीं है 
मैं खाली हाथ ही तो आए था 
कुछ नहीं था मेरे पास 
कुछ नहीं होगा जब जाऊंगा 
शायद तुम ले के जा सको 
तो ले लो न जो चाहिए मुझसे 
मुझे बस एक भरोषा दे दो 

__Infinity

Monday, February 8, 2021

मन है या मौसम

कभी कुछ भी अच्छा लगता है

कभी कुछ भी नहीं

ये मन है या मौसम 

मालूम नहीं


__Infinity

Monday, May 11, 2020

दुनिया तो है लेन-देन का नाम ग़ालिब

poor_widow

दुनिया तो है लेन-देन का नाम ग़ालिब
भगवान को भी चढावा मिलाता है
सिर्फ मन्नते पूरी करने के लिए.....

शहरों आम में चर्चा बहुत है तुम्हारी

शहरों आम में चर्चा बहुत है तुम्हारी
ऐसा गुनाह क्या कर दिया तुमने.....
----------------------शाश्वत श्रीपर्व

Friday, May 8, 2020

जिंदगी गरीबों की



चुग के ले गई राजनीतिक गिद्ध
मजदूरों की ज़िन्दगियाँ
रह गई पीछे
मुँह चिढ़ाती रूखी-सूखी रोटियां

#Infinity

Saturday, February 22, 2020

इंसान कीमती


न हिन्दू कीमती
न मुस्लमान कीमती
इस सारे जहाँ में सिर्फ
इंसान कीमती

#Infinity

Wednesday, October 31, 2018

भर फेफड़ा हवा कहाँ



मास्क बिक रहे हैं धरल्ले से बाज़ार में
कट के दरख्त कई पड़े है कतार में
सुबह की हवा वैसी नहीं रही अब
कहते फिर रहे है गमले में पौधे लिए सब
पूछते है पौधे बेचने वाले से कि
दे दो वो पौधा जो देता हो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन
बालकोनी के बौने पौधों क्या करेंगे दूर प्रदूषण
अब तक हम पीते थे पानी लगा के फ़िल्टर
मशीन खरीदनी है कल जो हवा को कर रही है साफ़
काश ये हवा साफ़ करने वाली मशीन लगी हो हर चौक पे
फिर २-४ गंगे पी लेंगे दोस्तों के साथ चाय की दूकान में
पूरी सांस भी नहीं मिलती है अब
भर फेफड़ा हवा कहाँ

#Infinity


Sunday, October 14, 2018

पत्थरों के बीच खिला है एक छोटा पौधा



पत्थरों के बीच खिला है एक छोटा पौधा
लड़ना था उसे बस
याद रहा उसे इतना हीं
किसने क्या कहा
किसने क्या किया
क्या मालूम क्या पता
उसने तो सिर्फ़ ये किया
कि उसने तो सिर्फ़ अपना पक्ष जिया
कहना तो बहुत था आसान
उसने सिर्फ़ किया
बेफ़िक्र जिया बेफ़िक्र जिया

#Infinity



हो जा सुनहरे पंखों पर सवार



यूँ ना हार
कर अपने डर को पार
यहीं थोड़ा अँधेरा है बस
वहाँ तो सब जगमग
कुछ तो सोचा है तेरे लिए भी
उसने
अनाथ भी है तो क्या पूरा जहाँ है तेरा
जिसे चाहे अपना बना
हो जा सुनहरे पंखों पर सवार


#Infinity


Monday, September 24, 2018

दबे कदम आ रही है ठण्ड



बस कुछ ही दूरी पर दिख रही है
अंगीठी छुपाये कम्बल लपेटे
चाय की चुस्कीओं में
ओस की बूंदो में चमकती
धुंध में चुप चाप
दबे कदम आ रही है ठण्ड


#Infinity

Tuesday, April 3, 2018

तुलसी आंगन की


Shashwat Shriparv Infinity


अपने घर में गमले की तुलसी को
निकाल दो
रोप आओ धरती के कलेजे में
जा के
वो भी दरख्त बनने की रखती है हैसियत


#Infinity


Wednesday, February 14, 2018

ख़ुशी की महक तेरे साथ जैसा



ख़ुशी की महक कैसी है पता कर जरा
जिंदगी में तेरे होने का एहसास जैसा ही होगा जानता हूँ

#Infinity


Friday, November 17, 2017

माँ है वो माँ ही तो है वो


तोड़ के अपने
बुन देती है पंख मेरे
टूटी भी हो खुद तो
जोड़ देती है मुझे हरवक्त
माँ है वो
आँसू ले के मेरे
पंखुड़ियां लौटा देती है गुलाब की
खाली पेट भी हो तो पूछती है और ले लो थोड़ी
दिखाती नही एक कतरा चोटिल भी हो गर
बटोर के ले लेती है दुख सारे
माँ है वो माँ ही तो है वो।
#Infinity




Sunday, October 15, 2017

फिर एक बार




स्ट्रीट लाइट की
सफ़ेद टूह टूह रोशनी मे
झूमते पतंगो को भी
इंतज़ार है
दिवाली के दीयों की टिमटिमाती रोशनी की
खाक हो जाने के लिए फिर एक बार


#Infinity

Sunday, August 13, 2017

अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो




हिन्दू को हिन्दू
मुस्लमान को मुसलमान ही रहने दो
कलयुग में बचा है जो थोड़ा सा
अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो

#Infinity


Saturday, July 1, 2017

जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार




जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार
कौन क्या ले गया है
क्या ले जा सकेगा कोई
जो संजोते रहते हो रोज
यूं ही भर जाएगा झुर्रियी से चेहरा
क्यूं भर लेते हो लकीरे माथे पर बार बार
कब रुकी है कब रुकेगी ये दुनिया
तुम हम वो हो या न हो
चलती है चलती रहेगी ये दुनिया


__Infinity



Thursday, May 25, 2017

ख़ुशी का ठिकाना कहीं और नहीं





वो खुश है
खुश ही रहता है वो अक्सर
शायद उसके ख़ुशी का ठिकाना कहीं और नहीं
उसके पास ही है....

__INfinity


Tuesday, April 11, 2017

इंतजार में बैठे रिश्ते



इंतजार में बैठे रिश्ते

तुम आओ उड़ के भरपूर
छू के आओ गगन सारा
लाँघ आओ महासागर सारे
हम यहीं है
रहेंगे इंतजार में जिन्दा रहने तक
अस्थियां भी करेंगी इंतज़ार तुम्हारा
जब थक जाना दौड़ते-दौड़ते
आज जाना
जब भी जरूरत पड़े सुस्ताने की
हमारे अंजुलिओं की छाँव
अब भी गहरी है
इंतजार में बैठे रिश्ते
फिर अपना लेंगे तुम्हे ......




__Infinity

Tuesday, February 14, 2017

सिर्फ ये दिन नहीं हर पल हर दिन तुम्हारा.......



खुशिया सिमट के आ जाती है पुरे जहांन की
 जब सिमट के आ जाती हो तुम बांहो में
 तुम्हारी सांसे मेरी सांसो से मिल के
मजबूत कर देती है धडकनो को मेरी
हर पल हर जन्म तुम्ही हो कायनात मेरी
गुजारिश है हर वक्त उस परवर दिगार से

__Infinity