दुनिया तो है लेन-देन का नाम ग़ालिब
भगवान को भी चढावा मिलाता है
सिर्फ मन्नते पूरी करने के लिए.....
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Monday, May 11, 2020
शहरों आम में चर्चा बहुत है तुम्हारी
शहरों आम में चर्चा बहुत है तुम्हारी
ऐसा गुनाह क्या कर दिया तुमने.....
----------------------शाश्वत श्रीपर्व
Friday, May 8, 2020
जिंदगी गरीबों की
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कविता.,
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Saturday, October 20, 2018
Sunday, October 14, 2018
Monday, September 24, 2018
Tuesday, April 3, 2018
तुलसी आंगन की

अपने घर में गमले की तुलसी को
निकाल दो
रोप आओ धरती के कलेजे में
जा के
वो भी दरख्त बनने की रखती है हैसियत
#Infinity
Friday, March 16, 2018
भूला नहीं तुझे भूल से भी
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Friday, November 17, 2017
Sunday, October 15, 2017
Sunday, August 13, 2017
Saturday, August 12, 2017
नोटों की चुप आवाज गूंजती है
नोटों की चुप आवाज गूंजती है
बहुत बहुत दूर दूर तक
भूखे पेट की आवाज़ लगी सबको
चुप बहुत चुप
#Infinity
Sunday, July 23, 2017
मर जाते है लोग भूख से यहाँ
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मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा
पूरी रात मैं नहीं सोया
कल रात मैं बहुत रोया
मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा बड़ा हुआ
मैं उसे बड़े बाग में रोप आया
अपनी छाहँ से निकाल उसे
कुदरत के भरोसे छोड़ आया।
पर खुश भी हूँ शायद
मेरे छोटे से गमले में बंधा शायद वो खुश न था
उस बगीचे के हरियाली में वो भी पेड़ बन जाये या खुदा
और फिर उसका बीज कभी मेरे गमले में वापिस आये।
फिर मैं सींच कर उसके बीज को एक छोटा पौधा फिर बनाऊं
और फिर किसी हरे भरे बड़े से बाग में लगा आऊँ।
#Infinity
Saturday, July 1, 2017
जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार
जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार
कौन क्या ले गया है
क्या ले जा सकेगा कोई
जो संजोते रहते हो रोज
यूं ही भर जाएगा झुर्रियी से चेहरा
क्यूं भर लेते हो लकीरे माथे पर बार बार
कब रुकी है कब रुकेगी ये दुनिया
तुम हम वो हो या न हो
चलती है चलती रहेगी ये दुनिया
__Infinity
Sunday, May 28, 2017
कोशिश मैन भी किया था
मैं हूँ वो छोटी सी गिलहरी रामायण वाली
धूल में लिपट के बस सेतु पर उड़ेल देता हूँ
कतरे धूल के कुछ
अंजुलियों को अपने पीठ पर फेरे जाने चाह में
लगा हूँ कोशिश बहुत छोटी सी है पुण्य के लड़ाई में
एक कतरा ही सही भविष्य को
कह पाऊंगा कि मैंने भी किया था कोशिश
नर्म बिस्तर छोड़ के मुश्किलें को थोड़ी
टक्कर दी है मैंने भी
भविष्य बचाने के लिए मैंने भी अपना वर्तमान दिया था
चुप नही सहा था मैंने साजिश समय का
कोशिश मैन भी किया था बेशक।
__∞
Thursday, May 25, 2017
Tuesday, April 11, 2017
इंतजार में बैठे रिश्ते
इंतजार में बैठे रिश्ते
तुम आओ उड़ के भरपूर
छू के आओ गगन सारा
लाँघ आओ महासागर सारे
हम यहीं है
रहेंगे इंतजार में जिन्दा रहने तक
अस्थियां भी करेंगी इंतज़ार तुम्हारा
जब थक जाना दौड़ते-दौड़ते
आज जाना
जब भी जरूरत पड़े सुस्ताने की
हमारे अंजुलिओं की छाँव
अब भी गहरी है
इंतजार में बैठे रिश्ते
फिर अपना लेंगे तुम्हे ......
__Infinity
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