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Sunday, August 27, 2023
घमंड न कर ऐ बंदे
गर खुद को बहुत बड़ा कलाकार मान बैठा है
तो ये जान लो ये करिश्मा उसका है जिनके हाथ नहीं।
घमंड न करना कभी इतराना नहीं बहुत
बहुत कलाकार बैठे है इस जहां तेरे अलावा भी।
_Infinity
Saturday, October 3, 2020
निष्ठुर ख्वाब गरीबी के
मेरी दुनिया वहीं
कहीं कोने में ही पड़ी है
मेरे सपनों का मोल
निर्धारित है मेरे पैदाइश के पहले से ही
बिक गए कौड़ियों के भाव सब पहली ही खेप में
अकीदतमंद है सिर्फ मेरी मेहनत
काफिर है सारे मेरे ख्वाब
बस कत्ल के लायक
मेरी औकाद
मेरे फटे कपड़े की दहलीज नहीं लांघती कभी
पूरी कोशिश से भी
मेहनत मेरी चमक साहब के चेहरे की
बनाये थे ताजमहल साहब
सारी दुनिया जानती है यही।
#Infinity
Wednesday, September 9, 2020
कामदार
मेरी दुनिया वहीं कहीं कोने में ही पड़ी है
मेरे सपनों का मोल पैदा होने से पहले से निर्धारित थे
बिक गए कौड़ियों के भाव
अकीदतमंद है मेरी मेहनत काफिर है सपने मेरे
बस कत्ल के लायक
मेरी औकाद मेरे फाटे कपड़े की दहलीज नहीं लांघ पाती
साहेब बनाये थे ताजमहल सारी दुनिया यही कहती है।
#Infinity
Saturday, September 5, 2020
बेकसूर गुनाहगार
बेकसूर गुनाहगार
मैं खुश हूं तो ग़म किसको है
क्यों तेरे अगोशे-शुकून का गुनाहगार हूँ मैं।
#Infinity
Friday, May 8, 2020
जिंदगी गरीबों की
Labels:
Abhivyakti,
poem,
अभिव्यक्ति,
असहमति,
एहसास,
कटाक्ष,
कविता,
कविता.,
छोटी कविता,
दर्द
Wednesday, October 31, 2018
भर फेफड़ा हवा कहाँ
मास्क बिक रहे हैं धरल्ले से बाज़ार में
कट के दरख्त कई पड़े है कतार में
सुबह की हवा वैसी नहीं रही अब
कहते फिर रहे है गमले में पौधे लिए सब
पूछते है पौधे बेचने वाले से कि
दे दो वो पौधा जो देता हो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन
बालकोनी के बौने पौधों क्या करेंगे दूर प्रदूषण
अब तक हम पीते थे पानी लगा के फ़िल्टर
मशीन खरीदनी है कल जो हवा को कर रही है साफ़
काश ये हवा साफ़ करने वाली मशीन लगी हो हर चौक पे
फिर २-४ गंगे पी लेंगे दोस्तों के साथ चाय की दूकान में
पूरी सांस भी नहीं मिलती है अब
भर फेफड़ा हवा कहाँ
#Infinity
Saturday, October 20, 2018
Sunday, October 15, 2017
उस पेड़ के कट जाने के बाद
उसके बाद
लूझ के उठा लेते थे जो बोझ अपनी पत्तियों पर
जमा है धूल हमारे खिड़कीओं पे वो अब
रोशनी की भी झुक जाती है कमर
लड़ते हुए इन मिट्टी जमी शीशों से
सांस की भी सीमा घट गई है
सड़क वाले उस पेड़ के कट जाने के बाद
#Infinity
Wednesday, October 4, 2017
रोको समाज में फैले अपने दरिंदो को
रोकते क्यों हो
अपनी बच्चिओं को जीने से,
अपनी बच्चिओं को जीने से,
रोको !
समाज में फैले अपने दरिंदो को
समाज में फैले अपने दरिंदो को
#Infinity
Saturday, August 12, 2017
नोटों की चुप आवाज गूंजती है
नोटों की चुप आवाज गूंजती है
बहुत बहुत दूर दूर तक
भूखे पेट की आवाज़ लगी सबको
चुप बहुत चुप
#Infinity
तुझे बना के शहंशाह जो की हमने खता
तुझे बना के शहंशाह जो की हमने खता
सज़ा देता है तू शायद बदले उसी के
#Infinity
Wednesday, August 2, 2017
Sunday, July 23, 2017
मर जाते है लोग भूख से यहाँ
Labels:
Abhivyakti,
Contradiction,
Kataksh,
kavita,
Pain,
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Sarcasm,
Syayari,
अभिव्यक्ति,
एहसास,
कटाक्ष,
कविता,
छोटी कविता,
दर्द
Friday, June 23, 2017
Someone else will take the credit
Let's kill fight destroy, God will take credit for that.
Let's ruin destruct Religion will take credit for that
Lets Cuts the trees Building will take the credit for that
Let's Rape the Girls Clothes will take credit for that
Let's cheat lie, Credit will go surely to others.
Let's take bribe, Work will take the credit for that
Let's abort an unborn life doctors will take credit for that
Let's kill the childhood and competition will take credit for that
Let's molest someone behaviour will take credit for that
Let's cheat someone Kal Aug will take credit for that
Let's cheat our partner's satisfaction will take credit for that
Let's discard old parent's Generation gap will take credit for that
Let's divide us, foreigners will take credit for that
Stop fooling around, It's more than we than them, Look in the Mirror passionately Mirror shows what we are ...
__Infinity__
Thursday, May 25, 2017
असली ऊपर वाला तो निचे बैठा है
मन्त्र पढ़ हिन्दू बन गए
कलमा पढ़ा बन गए मुस्लमान
हालालुया कह बन गए ईसाई
गुरुवाणी कह के सिक्ख हो गए
ऊपर वाला अँधा बेहरा और गूंगा है शयद
या कि सोचता होगाहम तो यूँ ही बैठे है
असली ऊपर वाला तो निचे बैठा है
__INfinity
Sunday, March 12, 2017
जिंदगी और मौत हर किसी का है
जिंदगी और मौत
हर किसी का है
कोई मान लेता है
किसी को मनना पड़ता है ग़ालिब
__Infinity
Wednesday, February 15, 2017
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