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Wednesday, September 9, 2020

कामदार


मेरी दुनिया वहीं कहीं कोने में ही पड़ी है
मेरे सपनों का मोल पैदा होने से पहले से निर्धारित थे
बिक गए कौड़ियों के भाव
अकीदतमंद है मेरी मेहनत काफिर है सपने मेरे
बस कत्ल के लायक
मेरी औकाद मेरे फाटे कपड़े की दहलीज नहीं लांघ पाती
साहेब बनाये थे ताजमहल सारी दुनिया यही कहती है।
#Infinity

Tuesday, April 3, 2018

तुलसी आंगन की


Shashwat Shriparv Infinity


अपने घर में गमले की तुलसी को
निकाल दो
रोप आओ धरती के कलेजे में
जा के
वो भी दरख्त बनने की रखती है हैसियत


#Infinity


Thursday, July 20, 2017




उनको तो पेट के लिए
बेचनी पड़ती है इज्जत
करना पड़ता है देह का व्यापार
तुम्हारी क्या मजबूरी थी
जो तुम लूट लेते हो अश्मत किसी की
कर क्यों देते हो
किसी का मन का देह ताड़-ताड़


__Infinity

Wednesday, February 15, 2017

परदे आँखों पे हो तो बेहतर है जनाब



परदे आँखों पे हो तो बेहतर है जनाब
कपड़े पुरे भी हो
 दरिंदे लूट जाते है आबरू अबलाओ की

 __Infinity