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Monday, November 29, 2021

सब ले लो

 तुम सब ले लो मुझसे 
मेरा कुछ भी तो नहीं है 
मैं खाली हाथ ही तो आए था 
कुछ नहीं था मेरे पास 
कुछ नहीं होगा जब जाऊंगा 
शायद तुम ले के जा सको 
तो ले लो न जो चाहिए मुझसे 
मुझे बस एक भरोषा दे दो 

__Infinity

Monday, May 11, 2020

दुनिया तो है लेन-देन का नाम ग़ालिब

poor_widow

दुनिया तो है लेन-देन का नाम ग़ालिब
भगवान को भी चढावा मिलाता है
सिर्फ मन्नते पूरी करने के लिए.....

शहरों आम में चर्चा बहुत है तुम्हारी

शहरों आम में चर्चा बहुत है तुम्हारी
ऐसा गुनाह क्या कर दिया तुमने.....
----------------------शाश्वत श्रीपर्व

Saturday, February 22, 2020

इंसान कीमती


न हिन्दू कीमती
न मुस्लमान कीमती
इस सारे जहाँ में सिर्फ
इंसान कीमती

#Infinity

Saturday, October 20, 2018

मन का रावण



रावण जल गया
मेला उसर गया
फिर पैदा किया जाएगा रावण
उसे करने दिया जाएगा ज़ुल्म
पाला पोशा जाएगा सँवारा जाएगा
कई एक के मन में बहुत भीतर
फिर एक बार अगले साल
उसे जला मार देने की होगी रश्म अदाएगी

#Infinity


Sunday, October 14, 2018

पत्थरों के बीच खिला है एक छोटा पौधा



पत्थरों के बीच खिला है एक छोटा पौधा
लड़ना था उसे बस
याद रहा उसे इतना हीं
किसने क्या कहा
किसने क्या किया
क्या मालूम क्या पता
उसने तो सिर्फ़ ये किया
कि उसने तो सिर्फ़ अपना पक्ष जिया
कहना तो बहुत था आसान
उसने सिर्फ़ किया
बेफ़िक्र जिया बेफ़िक्र जिया

#Infinity



Monday, September 24, 2018

दबे कदम आ रही है ठण्ड



बस कुछ ही दूरी पर दिख रही है
अंगीठी छुपाये कम्बल लपेटे
चाय की चुस्कीओं में
ओस की बूंदो में चमकती
धुंध में चुप चाप
दबे कदम आ रही है ठण्ड


#Infinity

Friday, March 16, 2018

भूला नहीं तुझे भूल से भी




तू नहीं तो क्या
तेरी याद मेरी ही तो है
तू याद है अब भी
भूला नहीं तुझे भूल से भी

#Infinity

Wednesday, February 14, 2018

ख़ुशी की महक तेरे साथ जैसा



ख़ुशी की महक कैसी है पता कर जरा
जिंदगी में तेरे होने का एहसास जैसा ही होगा जानता हूँ

#Infinity


Sunday, October 15, 2017

फिर एक बार




स्ट्रीट लाइट की
सफ़ेद टूह टूह रोशनी मे
झूमते पतंगो को भी
इंतज़ार है
दिवाली के दीयों की टिमटिमाती रोशनी की
खाक हो जाने के लिए फिर एक बार


#Infinity

उस पेड़ के कट जाने के बाद



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उसके बाद

लूझ के उठा लेते थे जो बोझ अपनी पत्तियों पर
जमा है धूल हमारे खिड़कीओं पे वो अब
रोशनी की भी झुक जाती है कमर
लड़ते हुए इन मिट्टी जमी शीशों से
सांस की भी सीमा घट गई है
सड़क वाले उस पेड़ के कट जाने के बाद

#Infinity

Sunday, August 13, 2017

अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो




हिन्दू को हिन्दू
मुस्लमान को मुसलमान ही रहने दो
कलयुग में बचा है जो थोड़ा सा
अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो

#Infinity


Saturday, August 12, 2017

तुझे बना के शहंशाह जो की हमने खता





तुझे बना के शहंशाह जो की हमने खता
सज़ा देता है तू शायद बदले उसी के

#Infinity



वोट दे के तुम्हे सहंनशाह बनाने वालो की खता





देश के लाल मर जायेंगे यूँ हीं
तो देश कौन संभालेगा ये बता
क्या है वोट दे के तुम्हे सहंनशाह बनाने वालो की खता
खुद की गुणगान में खर्च किये करोड़ो
कुछ एक बच्चो को न बचा सके
क्या है मेरे अपने, तुम्हारे होने के उस गद्दी पर
जब मेरे बच्चो का भविष्य में अंधेर है

#Infinity


Sunday, July 23, 2017

मर जाते है लोग भूख से यहाँ





फसलें सड़ जाती है गोदामों में
मर जाते है लोग भूख से यहाँ।



#Infinity


मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा



पूरी रात मैं नहीं सोया
कल रात मैं बहुत रोया
मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा बड़ा हुआ
मैं उसे बड़े बाग में रोप आया
अपनी छाहँ से निकाल उसे
कुदरत के भरोसे छोड़ आया।
पर खुश भी हूँ शायद
मेरे छोटे से गमले में बंधा शायद वो खुश न था
उस बगीचे के हरियाली में वो भी पेड़ बन जाये या खुदा
और फिर उसका बीज कभी मेरे गमले में वापिस आये।
फिर मैं सींच कर उसके बीज को एक छोटा पौधा फिर बनाऊं
और फिर किसी हरे भरे बड़े से बाग में लगा आऊँ।


#Infinity

Saturday, July 1, 2017

जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार




जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार
कौन क्या ले गया है
क्या ले जा सकेगा कोई
जो संजोते रहते हो रोज
यूं ही भर जाएगा झुर्रियी से चेहरा
क्यूं भर लेते हो लकीरे माथे पर बार बार
कब रुकी है कब रुकेगी ये दुनिया
तुम हम वो हो या न हो
चलती है चलती रहेगी ये दुनिया


__Infinity



Sunday, May 28, 2017

कोशिश मैन भी किया था


मैं हूँ वो छोटी सी गिलहरी रामायण वाली
धूल में लिपट के बस सेतु पर उड़ेल देता हूँ
कतरे धूल के कुछ
अंजुलियों को अपने पीठ पर फेरे जाने चाह में
लगा हूँ कोशिश बहुत छोटी सी है पुण्य के लड़ाई में
एक कतरा ही सही भविष्य को
कह पाऊंगा कि मैंने भी किया था कोशिश
नर्म बिस्तर छोड़ के मुश्किलें को थोड़ी
टक्कर दी है मैंने भी
भविष्य बचाने के लिए मैंने भी अपना वर्तमान दिया था
चुप नही सहा था मैंने साजिश समय का
कोशिश मैन भी किया था बेशक।

__∞


Thursday, May 25, 2017

ख़ुशी का ठिकाना कहीं और नहीं





वो खुश है
खुश ही रहता है वो अक्सर
शायद उसके ख़ुशी का ठिकाना कहीं और नहीं
उसके पास ही है....

__INfinity


Thursday, February 9, 2017

एहसास काफी है फिर एक बार जुड़ने के लिए

चुप रहिये कुछ बोलिये न बेशक
पर रहिये यही
एहसास काफी है फिर एक बार जुड़ने के लिए।
__Infinity