चिड़िया को याद आते है अपने पंख
जो सहेज के रक्खे है घोंसले मे
साथ लाई नहीं थी वो अपने साथ
भरोसा था उसको अपने कल पर
जो आज उसके कल की तरह माकूल नहीं है
लेकिन है उसे भारोसा
कि उसके पंख रक्खे है कहीं सुरक्षित उसके कल के साथ
करना नहीं है कुछ भी
अपने पंख उस कल से मांग लेना है फिर
अपने हक की तरह
फिर उड़ेगी चिड़िया
बस भरोसा करना है उसको खुद पर
कि फिर वो उड़ सकती है
आसमान के ऊपर ॥