दुनिया तो है लेन-देन का नाम ग़ालिब
भगवान को भी चढावा मिलाता है
सिर्फ मन्नते पूरी करने के लिए.....
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Monday, May 11, 2020
Sunday, October 14, 2018
Monday, September 24, 2018
Sunday, October 15, 2017
Sunday, August 13, 2017
Saturday, July 1, 2017
जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार
जिंदगी जियो भरपूर और मर जाओ यार
कौन क्या ले गया है
क्या ले जा सकेगा कोई
जो संजोते रहते हो रोज
यूं ही भर जाएगा झुर्रियी से चेहरा
क्यूं भर लेते हो लकीरे माथे पर बार बार
कब रुकी है कब रुकेगी ये दुनिया
तुम हम वो हो या न हो
चलती है चलती रहेगी ये दुनिया
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Monday, May 23, 2016
Saturday, May 7, 2016
Thursday, May 5, 2016
Wednesday, March 30, 2016
मासूम बेईमानीयाँ
तेरी मासूम बेईमानीयाँ खूबसूरत है इतनी
हजार ईमानदार कुर्बान क्यूँ न करे हम ....
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हजार ईमानदार कुर्बान क्यूँ न करे हम ....
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Tuesday, March 15, 2016
Monday, March 14, 2016
सरहद कि रक्षा करने वाला कोई निर्जीव लौटा है
पड़ोस मे छाया है सन्नाटा
चुप रहो चुप रहो
कि सरहद कि रक्षा करने वाला
कोई निर्जीव लौटा है
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चुप रहो चुप रहो
कि सरहद कि रक्षा करने वाला
कोई निर्जीव लौटा है
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Sunday, March 13, 2016
Wednesday, January 6, 2016
तुझे तब भी करूंगा प्यार
तुझे तब भी करूंगा प्यार
जब झुर्रियों से भर जाएगा तेरा चेहरा
और भी ज्यादा
जब तेरी आवाज नहीं रहेगी मीठी अब के जैसा
जब तू सीधी चल नहीं पाएगी तब भी
तुझे पकड़ कर सहारा दूँगा
मैं तब भी चाहूँगा तुझे उतना ही
जब हो जाएंगे तेरे सारे कपड़ो के साथ पोस्तीन ढीले
जब तू चल नहीं पाएगी तेज
मेरे कदम से कदम मिला के तब भी
उतना ही चाहूँगा तुझे
जब बैठे बैठे ऊँघेगी तू तब भी
उतना ही करूंगा प्यार
जब भूल जाओगी तुम बार बार
चाय मे चीनी
सब्जी मे नमक
तब भी करूंगा उतना ही प्यार
झड़ जाये बेशक तेरे सारे दांत
एड़ियाँ हो जाए चाहे कितनी भी खुश्क
फट जाये होठ तेरे चाहे
और भूरे हो जाए तेरे केस सारे
तब भी तुझे करूंगा उतना ही प्यार
तेरी अंतरआत्मा देखी है मैंने
जो कभी नहीं होगी पुरानी
बूढ़ी होगी नहीं कभी
हमेशा रहेगी नयी
बिलकुल तेरे आंखो मे बसी मेरे लिए बेचैनी की तरह
बार बार मुझे देख कर खुश होने वाले मन की तरह
तुझे अब की तरह तब भी करुंगा
बेंतहा प्यार .....
Tuesday, January 5, 2016
आब आई हो तो पास ही रहना
सुबह की शबनम की तरह तेरी आँखों की चमक
शाम के गिरते अंधेरों की तरह जुल्फों की छाव
गुलाब की पंखुड़ी सा तेरी होठों का एहसास
बारह मास खिलने वाले फूलो सा तेरा ये मन
कहाँ से लाई हो ये किस जहां से उतर के आई हो
मेरी जहन मे थी एक तस्वीर
अक्स बनाता था हमेशा मन के जमींन पर
बिलकुल उसी की तरह नजर आती हो तुम
आब आई हो तो पास ही रहना
बुढ़ापा बिताएँगे साथ-साथ
एक दूसरे की उंगली थामे
कंधे संभाले
चलेगे साथ, सात जन्मो की राह पर एक साथ ही
इस जिंदगी के चुक जाने के बाद
अब जिंदगी के हर हिस्से पर
किसी और का भी हक है
कोई और भी चिंतित है
सोंचते है हम भी अब किसी और के लिए
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Sunday, January 3, 2016
खुद को तेरी याद दिला लेते है
यू ही बैठे बैठे मुस्कुरा लेते है
खुद को तेरी याद दिला लेते है
वो तुझ से मिल के हुआ था एहसास
उसे बार बार खुद ही जगा लेते है
Tuesday, December 8, 2015
Thursday, July 23, 2015
जब भी मिला मुसकुराता मिला तू मुझसे
जब भी मिला मुसकुराता मिला तू मुझसे
लगता था मेरे दिल से तेरा दिल ज्यादा भरा है ...
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