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Monday, February 8, 2021

मन है या मौसम

कभी कुछ भी अच्छा लगता है

कभी कुछ भी नहीं

ये मन है या मौसम 

मालूम नहीं


__Infinity

Saturday, February 22, 2020

इंसान कीमती


न हिन्दू कीमती
न मुस्लमान कीमती
इस सारे जहाँ में सिर्फ
इंसान कीमती

#Infinity

Sunday, October 14, 2018

हो जा सुनहरे पंखों पर सवार



यूँ ना हार
कर अपने डर को पार
यहीं थोड़ा अँधेरा है बस
वहाँ तो सब जगमग
कुछ तो सोचा है तेरे लिए भी
उसने
अनाथ भी है तो क्या पूरा जहाँ है तेरा
जिसे चाहे अपना बना
हो जा सुनहरे पंखों पर सवार


#Infinity


Friday, March 16, 2018

भूला नहीं तुझे भूल से भी




तू नहीं तो क्या
तेरी याद मेरी ही तो है
तू याद है अब भी
भूला नहीं तुझे भूल से भी

#Infinity

Thursday, February 9, 2017

हो जाओ बड़े बहुत


हो जाओ बड़े बहुत
हो जाओ खूब दूर पुराने रिश्तों से
मत पहचानना,
जब यादे खटकाये किवाड़ तुम्हारा
याद रखना हमेशा लेकिन
जब भी तुम्हे तुम्हारे जैसे लोग
कभी दिल दुखाये तुम्हारा
कई कंधे तुम्हारे सर के इंतज़ार में तब भी होंगे
तुम्हारे आंसुओ के लिए
कुछ ईमानदार रिश्ते तब भी करेंगे इंतज़ार
कीमत जान जाओगे
उन उंगलिओ की
उठेंगी जो पोंछने के लिए आंसूओ तुम्हारे

__Infinity

Tuesday, August 30, 2016

तेरे साथ की उम्मीद जोड़ देती है


हर बार
टूट के हो जाता हूँ चूर चूर बिछड़ के तुझ
से फिर से तेरे साथ की उम्मीद जोड़ देती है

__Infinity

Wednesday, June 15, 2016

अच्छे मौसमों मे तो हर बात अच्छी होती है




तूफानो मे ही मांझी का पता चलता है
वरना अच्छे मौसमों मे तो हर बात अच्छी होती है

 __Infinity

Tuesday, April 19, 2016

मखमल का विस्तर


मखमल का विस्तर
चुभता रहा रात भर
एक मजदूर सूखी रोटी खा के
सो गया फर्श पर सुकून से

__Infinity

Sunday, March 27, 2016

चाँद लेकर साथ मे अपने फिर से मिलने आऊँगा


एक बार फिर मैं तेरी रात चुराने आऊँगा
साथ साथ तेरे दिन को साथ घुमाने आऊँगा
दूर हो गया तो क्या फिर
चाँद लेकर साथ मे अपने 
फिर से मिलने आऊँगा ...
__Infinity

Sunday, March 20, 2016

भाई अब उसके स्कूल जाते है रोज


वो लड़की अकेली खेलती है घर के बर्तनो से अब 

भाई अब उसके स्कूल जाते है रोज ... 
 __Infinity

Tuesday, March 15, 2016

बच्चे लगे है रोटी की जुगाड़ में⁠⁠⁠⁠


दुनिया लगी है चीखो-पुकार में
बच्चे लगे है रोटी की जुगाड़ में⁠⁠⁠⁠

__Infinity



Monday, March 14, 2016

सरहद कि रक्षा करने वाला कोई निर्जीव लौटा है

पड़ोस मे छाया है सन्नाटा
चुप रहो चुप रहो
कि सरहद कि रक्षा करने वाला
कोई निर्जीव लौटा है

__Infinity

कई किसान लटक जाते है फंदे से .





















बेमौसम बारिशों मे
जब चाय और पकौड़ो की सोचते हो तुम
कई किसान लटक जाते है फंदे से __Infinity

Friday, March 4, 2016

तेरा असर अब यूँ है हम पे




तेरा असर अब यूँ है हम पे
चेहरा सामने होता है तेरा हर एक हिचकी के बाद

Tuesday, January 26, 2016

Monday, January 18, 2016

कर दो ताड़ ताड़ मुझे एक बार फिर






































पोत दो कालिख मेरे मुह पे
निकाल लो भड़ास अपनी
साफ चेहरा
मेरा बेदाग जिश्म
सहन नहीं होता तुम से
मेरा दर्द खुश कर जाती होगी तुम्हें
बहन माँ पत्नी लड़की सिर्फ अपनी होती है न
दूसरों की हो तो क्या सिर्फ जिश्म
नोच लो गिद्ध बन जाओ
निर्वश्त्र कर दो एक द्रोपादी को फिर से
कृष्ण नहीं आते आब
बस बचे है सिर्फ दुर्योधन और दुसशासन
नंगा कर देने के लिए सार्वजनिक
धृतराष्ट्र आज भी काबिज है यहाँ सिंहशसन पर
भीष्म की प्रतिज्ञ कर के बैठे है लोग सिर्फ खुद के लिए
गांधारी को भी आंखो पर बंधे कपड़ो के आगे नहीं दिखाता है कुछ
बेंच आई थी मुझे मेरे जैसे ही कोई
भरोषा कर के हाथ पकड़ लिए था जिसका मैंने
आओ
मेरा अधिकार नहीं है कुछ
और सारा कर्तव्य मेरा
डरते क्यू हो तुमसे तो गलती हो जाएगी
और सारे सवाल मेरे
आओ दागदार कर दो मुझे
क्यो मैं हो सिर्फ जिश्स्म
दर्द तो सिर्फ खुद को होती है
दूसरों को तो होता है बहाना
आओ कर दो ताड़ ताड़ मुझे एक बार फिर


__Infinity 

Wednesday, December 23, 2015

बहोत दिन बाद ये बाहर आई है








बहोत दिन बाद ये बाहर आई है
एक सूखे पत्ते पे बहरो की खुमार आई है
ये एहसान तेरा ही है बस
की हर रोज हरा हो जाने का मन होता है अब

Friday, December 18, 2015

चाँद तो न दे पाएंगे







चाँद तो न दे पाएंगे ऐ हमहवा
देंगे एक छोटा था पौधा 
सींचना उसको जब आएंगे फूल उसपे
तो याद आएगी हमारी तुम्हें....