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Wednesday, September 9, 2020

कामदार


मेरी दुनिया वहीं कहीं कोने में ही पड़ी है
मेरे सपनों का मोल पैदा होने से पहले से निर्धारित थे
बिक गए कौड़ियों के भाव
अकीदतमंद है मेरी मेहनत काफिर है सपने मेरे
बस कत्ल के लायक
मेरी औकाद मेरे फाटे कपड़े की दहलीज नहीं लांघ पाती
साहेब बनाये थे ताजमहल सारी दुनिया यही कहती है।
#Infinity

Sunday, May 17, 2020

हमारा हक नही।

मेरे रहनुमा ने निकल दिए अपने दहलीज से
मजदूर है हम गरीब
मकान बनाते है
घर पे हमारा हक नहीं।

#Infinity

Friday, May 8, 2020

जिंदगी गरीबों की



चुग के ले गई राजनीतिक गिद्ध
मजदूरों की ज़िन्दगियाँ
रह गई पीछे
मुँह चिढ़ाती रूखी-सूखी रोटियां

#Infinity

Wednesday, October 31, 2018

भर फेफड़ा हवा कहाँ



मास्क बिक रहे हैं धरल्ले से बाज़ार में
कट के दरख्त कई पड़े है कतार में
सुबह की हवा वैसी नहीं रही अब
कहते फिर रहे है गमले में पौधे लिए सब
पूछते है पौधे बेचने वाले से कि
दे दो वो पौधा जो देता हो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन
बालकोनी के बौने पौधों क्या करेंगे दूर प्रदूषण
अब तक हम पीते थे पानी लगा के फ़िल्टर
मशीन खरीदनी है कल जो हवा को कर रही है साफ़
काश ये हवा साफ़ करने वाली मशीन लगी हो हर चौक पे
फिर २-४ गंगे पी लेंगे दोस्तों के साथ चाय की दूकान में
पूरी सांस भी नहीं मिलती है अब
भर फेफड़ा हवा कहाँ

#Infinity


Friday, March 16, 2018

भूला नहीं तुझे भूल से भी




तू नहीं तो क्या
तेरी याद मेरी ही तो है
तू याद है अब भी
भूला नहीं तुझे भूल से भी

#Infinity

Saturday, August 12, 2017

वोट दे के तुम्हे सहंनशाह बनाने वालो की खता





देश के लाल मर जायेंगे यूँ हीं
तो देश कौन संभालेगा ये बता
क्या है वोट दे के तुम्हे सहंनशाह बनाने वालो की खता
खुद की गुणगान में खर्च किये करोड़ो
कुछ एक बच्चो को न बचा सके
क्या है मेरे अपने, तुम्हारे होने के उस गद्दी पर
जब मेरे बच्चो का भविष्य में अंधेर है

#Infinity


Wednesday, August 2, 2017

उसके छोटे कंधे ने उठा लिया है समय से पहले सारे परिवार का बोझ






मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे में
चल रही है नोटों की गिनती
बाहर मर जा रहा है
भूख से हर रोज कोई मजबूर आत्मा
गुल्ली डंडे वाले हाँथ
ढूंढता है कूड़े के ढेर में रोटी
गिनता है रोटी और घर के सदस्य
उसके छोटे कंधे ने उठा लिया है
समय से पहले सारे परिवार का बोझ


#Infinity

Saturday, July 29, 2017

न चले फटे जेब का बहाना शायद



आज शाम लौटने के बाद घर काम के बाद
न चले फटे जेब का बहाना शायद
बच्चे हो गए है समझदार उनकीं आंखे बता देती है सब।

#Infinity

Sunday, July 23, 2017

मर जाते है लोग भूख से यहाँ





फसलें सड़ जाती है गोदामों में
मर जाते है लोग भूख से यहाँ।



#Infinity


मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा



पूरी रात मैं नहीं सोया
कल रात मैं बहुत रोया
मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा बड़ा हुआ
मैं उसे बड़े बाग में रोप आया
अपनी छाहँ से निकाल उसे
कुदरत के भरोसे छोड़ आया।
पर खुश भी हूँ शायद
मेरे छोटे से गमले में बंधा शायद वो खुश न था
उस बगीचे के हरियाली में वो भी पेड़ बन जाये या खुदा
और फिर उसका बीज कभी मेरे गमले में वापिस आये।
फिर मैं सींच कर उसके बीज को एक छोटा पौधा फिर बनाऊं
और फिर किसी हरे भरे बड़े से बाग में लगा आऊँ।


#Infinity

Friday, June 23, 2017

Someone else will take the credit



Let's kill fight destroy, God will take credit for that.
Let's ruin destruct Religion will take credit for that
Lets Cuts the trees Building will take the credit for that
Let's Rape the Girls Clothes will take credit for that
Let's cheat lie, Credit will go surely to others.
Let's take bribe, Work will take the credit for that
Let's abort an unborn life doctors will take credit for that
Let's kill the childhood and competition will take credit for that
Let's molest someone behaviour will take credit for that
Let's cheat someone Kal Aug will take credit for that
Let's cheat our partner's satisfaction will take credit for that
Let's discard old parent's Generation gap will take credit for that
Let's divide us, foreigners will take credit for that
Stop fooling around, It's more than we than them, Look in the Mirror passionately Mirror shows what we are ...


__Infinity__


Tuesday, April 11, 2017

इंतजार में बैठे रिश्ते



इंतजार में बैठे रिश्ते

तुम आओ उड़ के भरपूर
छू के आओ गगन सारा
लाँघ आओ महासागर सारे
हम यहीं है
रहेंगे इंतजार में जिन्दा रहने तक
अस्थियां भी करेंगी इंतज़ार तुम्हारा
जब थक जाना दौड़ते-दौड़ते
आज जाना
जब भी जरूरत पड़े सुस्ताने की
हमारे अंजुलिओं की छाँव
अब भी गहरी है
इंतजार में बैठे रिश्ते
फिर अपना लेंगे तुम्हे ......




__Infinity

Wednesday, February 15, 2017

परदे आँखों पे हो तो बेहतर है जनाब



परदे आँखों पे हो तो बेहतर है जनाब
कपड़े पुरे भी हो
 दरिंदे लूट जाते है आबरू अबलाओ की

 __Infinity

Thursday, February 9, 2017

हो जाओ बड़े बहुत


हो जाओ बड़े बहुत
हो जाओ खूब दूर पुराने रिश्तों से
मत पहचानना,
जब यादे खटकाये किवाड़ तुम्हारा
याद रखना हमेशा लेकिन
जब भी तुम्हे तुम्हारे जैसे लोग
कभी दिल दुखाये तुम्हारा
कई कंधे तुम्हारे सर के इंतज़ार में तब भी होंगे
तुम्हारे आंसुओ के लिए
कुछ ईमानदार रिश्ते तब भी करेंगे इंतज़ार
कीमत जान जाओगे
उन उंगलिओ की
उठेंगी जो पोंछने के लिए आंसूओ तुम्हारे

__Infinity

Tuesday, August 30, 2016

देश बिक रहा है





देश बिक रहा है
तुम भी अपना हिस्सा बेंच दो  हुक्मराणों
हम तो तब भी फकीर थे
रहेंगे वही
हमारे हिस्से मे तो दो गज जमीन भी नहीं
गिरेंगे कहीं मिल जाएंगे मिट्टी मे
उगे थे जहां से
तुम अपने सोने वाले पंख लगा के
उड़ जाना फूलों के बाग की ओर

__Infinity

Monday, June 13, 2016

धरती माँ का गला दबा रहे है






सजीब पेड़ को काट कर
निर्जीव कंकरीट के जंगल बना रहे है
हर रोज एक किस्त
अपने धरती माँ का गला दबा रहे है


__Infinity

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Tuesday, April 19, 2016

मखमल का विस्तर


मखमल का विस्तर
चुभता रहा रात भर
एक मजदूर सूखी रोटी खा के
सो गया फर्श पर सुकून से

__Infinity

Tuesday, March 22, 2016

दीवारें बोलती है पेंट से अब यहाँ

दीवारें बोलती है पेंट से अब यहाँ
रिश्ते सारे चुप बहुत चुप है इस घर के अंदर ....

__Infinity

Sunday, March 20, 2016

भाई अब उसके स्कूल जाते है रोज


वो लड़की अकेली खेलती है घर के बर्तनो से अब 

भाई अब उसके स्कूल जाते है रोज ... 
 __Infinity

Tuesday, March 15, 2016

जिंदगी दौड़ती है अपने रफ़्तार से


जिंदगी दौड़ती है अपने रफ़्तार से 
बच्चे लगे है रोटी की जुगाड़ में
पेट तो भर लेते है खुद ही ये
बहुतो की रोटियां सिक जाती है इनके नाम से
__Infinity