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Monday, September 24, 2018

दबे कदम आ रही है ठण्ड



बस कुछ ही दूरी पर दिख रही है
अंगीठी छुपाये कम्बल लपेटे
चाय की चुस्कीओं में
ओस की बूंदो में चमकती
धुंध में चुप चाप
दबे कदम आ रही है ठण्ड


#Infinity

Wednesday, February 14, 2018

ख़ुशी की महक तेरे साथ जैसा



ख़ुशी की महक कैसी है पता कर जरा
जिंदगी में तेरे होने का एहसास जैसा ही होगा जानता हूँ

#Infinity


Wednesday, June 1, 2016

सहंशाह हो गया मिल के तुझ से















मेरा वजूद तुझ से है 
तू है तो मैं कामिल हूँ
फकीर था  हुआ यू अब कि
सहंशाह हो गया मिल के तुझ से

__Infinity






Thursday, May 12, 2016

हर जीत अब तुझ से जुड़ी है





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जिंदगी से कुछ ज्यादा ही जुड़ने लगा हूँ मैं
अब मेरी जिंदगी में शामिल है तू
​साँसो को संभाल के रखता हू अब मैं 
हक है इसपे तेरा मुझ से ज्यादा
तुझ ​पे हार जाऊँ सब अब यूँ कि
हर जीत अब तुझ से जुड़ी है 



__Infinity

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मेरी जिंदगी का अधूरा पक्ष अब तुझ से ही पूरा होता है


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मेरी शाम सुबह है तुझसे अब
दिन रात तुझी से होता है
मेरी जिंदगी का अधूरा पक्ष
अब तुझ से ही पूरा होता है

__Infinity
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