Tuesday, April 11, 2017

इंतजार में बैठे रिश्ते



इंतजार में बैठे रिश्ते

तुम आओ उड़ के भरपूर
छू के आओ गगन सारा
लाँघ आओ महासागर सारे
हम यहीं है
रहेंगे इंतजार में जिन्दा रहने तक
अस्थियां भी करेंगी इंतज़ार तुम्हारा
जब थक जाना दौड़ते-दौड़ते
आज जाना
जब भी जरूरत पड़े सुस्ताने की
हमारे अंजुलिओं की छाँव
अब भी गहरी है
इंतजार में बैठे रिश्ते
फिर अपना लेंगे तुम्हे ......




__Infinity

Sunday, March 12, 2017

जिंदगी और मौत हर किसी का है

जिंदगी और मौत
हर किसी का है
कोई मान लेता है
किसी को मनना पड़ता है ग़ालिब

__Infinity



Wednesday, February 15, 2017

परदे आँखों पे हो तो बेहतर है जनाब



परदे आँखों पे हो तो बेहतर है जनाब
कपड़े पुरे भी हो
 दरिंदे लूट जाते है आबरू अबलाओ की

 __Infinity

Tuesday, February 14, 2017

सिर्फ ये दिन नहीं हर पल हर दिन तुम्हारा.......



खुशिया सिमट के आ जाती है पुरे जहांन की
 जब सिमट के आ जाती हो तुम बांहो में
 तुम्हारी सांसे मेरी सांसो से मिल के
मजबूत कर देती है धडकनो को मेरी
हर पल हर जन्म तुम्ही हो कायनात मेरी
गुजारिश है हर वक्त उस परवर दिगार से

__Infinity

Thursday, February 9, 2017

एहसास काफी है फिर एक बार जुड़ने के लिए

चुप रहिये कुछ बोलिये न बेशक
पर रहिये यही
एहसास काफी है फिर एक बार जुड़ने के लिए।
__Infinity

हो जाओ बड़े बहुत


हो जाओ बड़े बहुत
हो जाओ खूब दूर पुराने रिश्तों से
मत पहचानना,
जब यादे खटकाये किवाड़ तुम्हारा
याद रखना हमेशा लेकिन
जब भी तुम्हे तुम्हारे जैसे लोग
कभी दिल दुखाये तुम्हारा
कई कंधे तुम्हारे सर के इंतज़ार में तब भी होंगे
तुम्हारे आंसुओ के लिए
कुछ ईमानदार रिश्ते तब भी करेंगे इंतज़ार
कीमत जान जाओगे
उन उंगलिओ की
उठेंगी जो पोंछने के लिए आंसूओ तुम्हारे

__Infinity

Wednesday, November 2, 2016

गुनाह, सिर्फ ईमानदारी है


यू ना हुआ करो खफा
आईने से हर वक्त
गुनाह, सिर्फ ईमानदारी है उसकी
काम ही है उसका
वो तो सिर्फ चेहरे दिखता है

__Infinity

Wednesday, August 31, 2016

मौत चुग के ले जाएगी खुद बखुद

इंतज़ार न करो 
जिए जाओ बेफिक्र भरपूर
मौत चुग के ले जाएगी खुद बखुद



__Infinity

Tuesday, August 30, 2016

तेरे साथ की उम्मीद जोड़ देती है


हर बार
टूट के हो जाता हूँ चूर चूर बिछड़ के तुझ
से फिर से तेरे साथ की उम्मीद जोड़ देती है

__Infinity

खोद दो जड़े चाहे जितनी भी हमारी


खोद दो जड़े
चाहे जितनी भी हमारी
बरगद है
कहीं और जमा लेंगे

 __Infinity