Sunday, April 8, 2018

यायावर





यायावर हम भी होते
गर जिम्मेदारिओं से प्यार न होता


#Infinity

Tuesday, April 3, 2018

तुलसी आंगन की


Shashwat Shriparv Infinity


अपने घर में गमले की तुलसी को
निकाल दो
रोप आओ धरती के कलेजे में
जा के
वो भी दरख्त बनने की रखती है हैसियत


#Infinity


Friday, March 16, 2018

भूला नहीं तुझे भूल से भी




तू नहीं तो क्या
तेरी याद मेरी ही तो है
तू याद है अब भी
भूला नहीं तुझे भूल से भी

#Infinity

Wednesday, February 14, 2018

ख़ुशी की महक तेरे साथ जैसा



ख़ुशी की महक कैसी है पता कर जरा
जिंदगी में तेरे होने का एहसास जैसा ही होगा जानता हूँ

#Infinity


Friday, November 17, 2017

माँ है वो माँ ही तो है वो


तोड़ के अपने
बुन देती है पंख मेरे
टूटी भी हो खुद तो
जोड़ देती है मुझे हरवक्त
माँ है वो
आँसू ले के मेरे
पंखुड़ियां लौटा देती है गुलाब की
खाली पेट भी हो तो पूछती है और ले लो थोड़ी
दिखाती नही एक कतरा चोटिल भी हो गर
बटोर के ले लेती है दुख सारे
माँ है वो माँ ही तो है वो।
#Infinity




Sunday, October 15, 2017

फिर एक बार




स्ट्रीट लाइट की
सफ़ेद टूह टूह रोशनी मे
झूमते पतंगो को भी
इंतज़ार है
दिवाली के दीयों की टिमटिमाती रोशनी की
खाक हो जाने के लिए फिर एक बार


#Infinity

उस पेड़ के कट जाने के बाद



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उसके बाद

लूझ के उठा लेते थे जो बोझ अपनी पत्तियों पर
जमा है धूल हमारे खिड़कीओं पे वो अब
रोशनी की भी झुक जाती है कमर
लड़ते हुए इन मिट्टी जमी शीशों से
सांस की भी सीमा घट गई है
सड़क वाले उस पेड़ के कट जाने के बाद

#Infinity

Wednesday, October 4, 2017

रोको समाज में फैले अपने दरिंदो को





रोकते क्यों हो 
अपनी बच्चिओं को जीने से,
रोको !
समाज में फैले अपने दरिंदो को
#Infinity



Sunday, August 13, 2017

अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो




हिन्दू को हिन्दू
मुस्लमान को मुसलमान ही रहने दो
कलयुग में बचा है जो थोड़ा सा
अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो

#Infinity


Saturday, August 12, 2017

नोटों की चुप आवाज गूंजती है



नोटों की चुप आवाज गूंजती है
बहुत बहुत दूर दूर तक
भूखे पेट की आवाज़ लगी सबको
चुप बहुत चुप


#Infinity