Wednesday, February 24, 2016

फूक मार के उड़ा दिया

गर्दिशों मे हो गया गुमनाम कोई
उसने राख़ समझा
फूक मार के उड़ा दिया

__Infinity

Tuesday, January 26, 2016

Friday, January 22, 2016

उंगली पकड़ लो पापा

दहेज़ के लिए जहर पिला दी गई बेटी को
पिता ने बहा दिया नदी में
साथ साथ किनारे किनारे वो भी तैरता रहा
बेटी के साथ
साथ जहर उतार जाये
और उठ के बेटी फिर बुलाये
उंगली पकड़ लो पाप

__ Infinity

Monday, January 18, 2016

कर दो ताड़ ताड़ मुझे एक बार फिर






































पोत दो कालिख मेरे मुह पे
निकाल लो भड़ास अपनी
साफ चेहरा
मेरा बेदाग जिश्म
सहन नहीं होता तुम से
मेरा दर्द खुश कर जाती होगी तुम्हें
बहन माँ पत्नी लड़की सिर्फ अपनी होती है न
दूसरों की हो तो क्या सिर्फ जिश्म
नोच लो गिद्ध बन जाओ
निर्वश्त्र कर दो एक द्रोपादी को फिर से
कृष्ण नहीं आते आब
बस बचे है सिर्फ दुर्योधन और दुसशासन
नंगा कर देने के लिए सार्वजनिक
धृतराष्ट्र आज भी काबिज है यहाँ सिंहशसन पर
भीष्म की प्रतिज्ञ कर के बैठे है लोग सिर्फ खुद के लिए
गांधारी को भी आंखो पर बंधे कपड़ो के आगे नहीं दिखाता है कुछ
बेंच आई थी मुझे मेरे जैसे ही कोई
भरोषा कर के हाथ पकड़ लिए था जिसका मैंने
आओ
मेरा अधिकार नहीं है कुछ
और सारा कर्तव्य मेरा
डरते क्यू हो तुमसे तो गलती हो जाएगी
और सारे सवाल मेरे
आओ दागदार कर दो मुझे
क्यो मैं हो सिर्फ जिश्स्म
दर्द तो सिर्फ खुद को होती है
दूसरों को तो होता है बहाना
आओ कर दो ताड़ ताड़ मुझे एक बार फिर


__Infinity 

Saturday, January 16, 2016

किसी की इबादत क्यों करे कोई






















ये बच्चा करता है 
जूता पालिश
जीता है अपनी जिंदगी
किसी से शिकायत नहीं
किसी की इबादत क्यों करे कोई

Wednesday, January 6, 2016

तुझे तब भी करूंगा प्यार



























तुझे तब भी करूंगा प्यार
जब झुर्रियों से भर जाएगा तेरा चेहरा
और भी ज्यादा
जब तेरी आवाज नहीं रहेगी मीठी अब के जैसा
जब तू सीधी चल नहीं पाएगी तब भी
तुझे पकड़ कर सहारा दूँगा
मैं तब भी चाहूँगा तुझे उतना ही
जब हो जाएंगे तेरे सारे कपड़ो के साथ पोस्तीन ढीले
जब तू चल नहीं पाएगी तेज
मेरे कदम से कदम मिला के तब भी
उतना ही चाहूँगा तुझे
जब बैठे बैठे ऊँघेगी तू तब भी
उतना ही करूंगा प्यार
जब भूल जाओगी तुम बार बार
चाय मे चीनी
सब्जी मे नमक
तब भी करूंगा उतना ही प्यार
झड़ जाये बेशक तेरे सारे दांत
एड़ियाँ हो जाए चाहे कितनी भी खुश्क
फट जाये होठ तेरे चाहे
और भूरे हो जाए तेरे केस सारे
तब भी तुझे करूंगा उतना ही प्यार
तेरी अंतरआत्मा देखी है मैंने
जो कभी नहीं होगी पुरानी
बूढ़ी होगी नहीं कभी
हमेशा रहेगी नयी
बिलकुल तेरे आंखो मे बसी मेरे लिए बेचैनी की तरह
बार बार मुझे देख कर खुश होने वाले मन की तरह
तुझे अब की तरह तब भी करुंगा
बेंतहा प्यार .....

Tuesday, January 5, 2016

आब आई हो तो पास ही रहना






























सुबह की शबनम की तरह तेरी आँखों की चमक
शाम के गिरते अंधेरों की तरह जुल्फों की छाव
गुलाब की पंखुड़ी सा तेरी होठों का एहसास
बारह मास खिलने वाले फूलो सा तेरा ये मन
कहाँ से लाई हो ये किस जहां से उतर के आई हो
मेरी जहन मे थी एक तस्वीर
अक्स बनाता था हमेशा मन के जमींन पर
बिलकुल उसी की तरह नजर आती हो तुम
आब आई हो तो पास ही रहना
बुढ़ापा बिताएँगे साथ-साथ
एक दूसरे की उंगली थामे
कंधे संभाले
चलेगे साथ, सात जन्मो की राह पर एक साथ ही
इस जिंदगी के चुक जाने के बाद
अब जिंदगी के हर हिस्से पर
किसी और का भी हक है
कोई और भी चिंतित है
सोंचते है हम भी अब किसी और के लिए

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Sunday, January 3, 2016

खुद को तेरी याद दिला लेते है

यू ही बैठे बैठे मुस्कुरा लेते है
खुद को तेरी याद दिला लेते है
वो तुझ से मिल के हुआ था एहसास
उसे बार बार खुद ही जगा लेते है

Sunday, December 27, 2015

घर पे बची है बूढी आँखे इंतज़ार में

छत पे कोई नहीं जाता अब खेलने
शोर करने
ऊपर जाती सीढ़ियों पर
जम गई है बहुत सारी धूल
कुछ बुजुर्ग कदम जाते है
अब ऊपर शाम को
निशान है पड़े है निरीह सीढियो पर पैरो के
जाते है  इंतज़ार करने
आता नहीं है कोई
शायद बेटे बहूँ बच्चे आ रहे होंगे इस रास्ते
या कोई बेटी मायका की तरफ निकली हो कहीं
घर में बचे है बुजुर्ग समय है जिनके पास बात करने की
एक दूसरे को देते है सांत्वना
चलो खुश होंगे बच्चे जहाँ है
समय मिलेगा तो आएंगे जरूर
फिर गूंजेगा छत सीढ़ी घर
बच्चों के शोर से
की बच्चे बड़े हो गए
और उड़ गए है घोसला छोड़ के
कुछ तलाशने कुछ पाने
घर में बूढी बची आँखे
इंतज़ार में है
की फिर हरे होंगे गमलो में सूखते हुए पौधे

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Thursday, December 24, 2015

एक अजनबी











एक अजनबी 

एक अजनबी से यूँ मिले ...जैसे कोई पुराना सा था 
मस्तिष्क के किसी कोने में कोई  छुपा सा था 
कुछ अजब सी बात थी उनके आने की 
कुछ अनकहा कुछ अनसुना कुछ अनदेखा सा 
मन को ये ख्याल आया की इस से ही बंधा था शायद 
कुछ अजब गजब रिश्ता है सब सुलझा सब बंधा सा है 
एक खुला असमान एक अंतहीन आकाश सा .................
सुन्दर कुछ भाव... फूलों से भी कोमल एहसास 
एक अजनबी से यूँ मिले ........जैसे कोई पुराना सा था ..........