Wednesday, October 4, 2017
रोको समाज में फैले अपने दरिंदो को
रोकते क्यों हो
अपनी बच्चिओं को जीने से,
रोको !
समाज में फैले अपने दरिंदो को
#Infinity
Sunday, August 13, 2017
अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो
हिन्दू को हिन्दू
मुस्लमान को मुसलमान ही रहने दो
कलयुग में बचा है जो थोड़ा सा
अंदर के इंसान को इंसान ही रहने दो
#Infinity
Saturday, August 12, 2017
नोटों की चुप आवाज गूंजती है
नोटों की चुप आवाज गूंजती है
बहुत बहुत दूर दूर तक
भूखे पेट की आवाज़ लगी सबको
चुप बहुत चुप
#Infinity
तुझे बना के शहंशाह जो की हमने खता
तुझे बना के शहंशाह जो की हमने खता
सज़ा देता है तू शायद बदले उसी के
#Infinity
वोट दे के तुम्हे सहंनशाह बनाने वालो की खता
देश के लाल मर जायेंगे यूँ हीं
तो देश कौन संभालेगा ये बता
क्या है वोट दे के तुम्हे सहंनशाह बनाने वालो की खता
खुद की गुणगान में खर्च किये करोड़ो
कुछ एक बच्चो को न बचा सके
क्या है मेरे अपने, तुम्हारे होने के उस गद्दी पर
जब मेरे बच्चो का भविष्य में अंधेर है
#Infinity
Thursday, August 3, 2017
आप दान करना चाहते तो अनाथालय या वृद्धाश्रम में कीजिये एक जगह किसी को अपनो ने छोड़ दिया और एक तरफ किसी को अपना मिला ही नही
आप दान करना चाहते तो अनाथालय या वृद्धाश्रम में कीजिये एक जगह किसी को अपनो ने छोड़ दिया और एक तरफ किसी को अपना मिला ही नही
#Infinity
Wednesday, August 2, 2017
उसके छोटे कंधे ने उठा लिया है समय से पहले सारे परिवार का बोझ
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे में
चल रही है नोटों की गिनती
बाहर मर जा रहा है
भूख से हर रोज कोई मजबूर आत्मा
गुल्ली डंडे वाले हाँथ
ढूंढता है कूड़े के ढेर में रोटी
गिनता है रोटी और घर के सदस्य
उसके छोटे कंधे ने उठा लिया है
समय से पहले सारे परिवार का बोझ
#Infinity
Saturday, July 29, 2017
न चले फटे जेब का बहाना शायद
आज शाम लौटने के बाद घर काम के बाद
न चले फटे जेब का बहाना शायद
बच्चे हो गए है समझदार उनकीं आंखे बता देती है सब।
#Infinity
Sunday, July 23, 2017
मर जाते है लोग भूख से यहाँ
फसलें सड़ जाती है गोदामों में
मर जाते है लोग भूख से यहाँ।
#Infinity
मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा
पूरी रात मैं नहीं सोया
कल रात मैं बहुत रोया
मेरे बालकोनी के गमले का वह नन्हा सा पौधा बड़ा हुआ
मैं उसे बड़े बाग में रोप आया
अपनी छाहँ से निकाल उसे
कुदरत के भरोसे छोड़ आया।
पर खुश भी हूँ शायद
मेरे छोटे से गमले में बंधा शायद वो खुश न था
उस बगीचे के हरियाली में वो भी पेड़ बन जाये या खुदा
और फिर उसका बीज कभी मेरे गमले में वापिस आये।
फिर मैं सींच कर उसके बीज को एक छोटा पौधा फिर बनाऊं
और फिर किसी हरे भरे बड़े से बाग में लगा आऊँ।
#Infinity
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