Saturday, August 22, 2015
Saturday, August 1, 2015
मुझे मालूम नहीं कि वो हिन्दू कि मुस्लल्लम इमां था पर मालूम है जरूर कि वो अब्दुल कलाम था वो मैं भी उस की तरह होना चाहता रहा पर जा के बता दिया उसने की कुछ तो है या रह गई कमी हममे उसकी तरह होने के लिए।।।_Infinity
मुझे मालूम नहीं कि
वो हिन्दू कि मुस्लल्लम इमां था
पर मालूम है जरूर कि
वो अब्दुल कलाम था वो
मैं भी उस की तरह होना चाहता रहा
पर जा के बता दिया उसने की कुछ
तो है या रह गई कमी हममे
उसकी तरह होने के लिए।।।_Infinity
वो हिन्दू कि मुस्लल्लम इमां था
पर मालूम है जरूर कि
वो अब्दुल कलाम था वो
मैं भी उस की तरह होना चाहता रहा
पर जा के बता दिया उसने की कुछ
तो है या रह गई कमी हममे
उसकी तरह होने के लिए।।।_Infinity
एक साबुन था कलाम साफ कर गया बहुतो को अपने झाग से _Infinity
एक साबुन था
कलाम साफ कर गया बहुतो को
अपने झाग से
_Infinity
कलाम साफ कर गया बहुतो को
अपने झाग से
_Infinity
जिसको जो चाहिये था मिला भरपूर
नशे में था दोनों ही
कलाम और याकूब
एक आवद करना चाहता था
एक बर्बाद देश को
दोनों को जो चाहिए था मिला
एक को आदर
एक को नफ़रत पुरे मुल्क का
जिसको जो चाहिये था मिला भरपूर
_Infinity
कलाम और याकूब
एक आवद करना चाहता था
एक बर्बाद देश को
दोनों को जो चाहिए था मिला
एक को आदर
एक को नफ़रत पुरे मुल्क का
जिसको जो चाहिये था मिला भरपूर
_Infinity
Monday, July 27, 2015
Thursday, July 23, 2015
न जाने गम छुपाने का हुनर किधर से ढूंढ लाता था वो
मूस्कुराता तो था
हँसता भी था ठहाकों मे
न जाने गम छुपाने का हुनर
किधर से ढूंढ लाता था वो .....
--Infinity
हँसता भी था ठहाकों मे
न जाने गम छुपाने का हुनर
किधर से ढूंढ लाता था वो .....
--Infinity
जब भी मिला मुसकुराता मिला तू मुझसे
जब भी मिला मुसकुराता मिला तू मुझसे
लगता था मेरे दिल से तेरा दिल ज्यादा भरा है ...
---Infinity
Saturday, July 11, 2015
भागते हुए जिंदिगी की राह की शाम हो गई
चलते फिरते
भागते हुए जिंदिगी की राह की शाम हो गई
फिर मिलते है कल सुबह एक नींद के बाद
--Infinity
भागते हुए जिंदिगी की राह की शाम हो गई
फिर मिलते है कल सुबह एक नींद के बाद
--Infinity
Wednesday, July 8, 2015
Subscribe to:
Posts (Atom)




