Friday, July 18, 2014

रोटी सिर्फ एक है और भूखे दोगुने

उसके घर मे भी
पक गई रोटी
रोटी सिर्फ एक है और भूखे दोगुने
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पता न चला कब बारिश के पानी कब धुले गए थे आँसू....

बारिश हुई थी कल किसी की आँख गीली हुई थी
पता न चला कब बारिश के पानी कब धुले गए थे आँसू....
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Wednesday, July 2, 2014

सब अपनी अपनी हरम मिटाते है यहाँ

















कौन किसके लिए किससे  लड़ता है यहाँ
सब अपनी अपनी हरम मिटाते है यहाँ
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उनकी औकात बहुत बड़ी थी














हमारे फटे थे कपड़े की औकात नहीं थी हमारी
उनकी औकात बहुत बड़ी थी
इसलिए खुद फाड़ लिया
और फटे हिस्सो से उनके शरीर के अंग
मुह चिढ़ाते रहे हमे......
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भिंगा के अंदर तक घायल कर गई बरसात आज


















घनघोर बारिश की बौछार ने  झकझोर दिया आज
वो पुल के नीचे जीने वाला बूढ़ा कहा सोएगा आज
भिंगा के अंदर तक घायल कर गई बरसात आज
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Saturday, June 21, 2014

ऊसके अपने ही थूक से मिटती रही उसकी भूख


 


















 रोड पे बैठे भिखारी ने आधी रोटी कुत्ते को दे दी
आर आधी बचा के रख ली रात के गुजरे के लिय
और पिज्जा हट मे बैठे इंसान को देखता रहा एक भूखा बच्चा
शीशे की दीवार के दूसरी ओर से टक टक
और ऊसके अपने ही थूक से मिटती रही उसकी भूख
और बचे हुए पिज्जे से कूड़ेदान ने भर लिया अपना पेट
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बहुत दूर निकाल गया था तू शायद

















बहुत तलाशा मैंने तुम्हें
बहुत दूर निकाल गया था तू शायद
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Wednesday, June 18, 2014

जहाँ मासूम काट दिये जाते है निर्ममता से


















जहाँ मासूम काट दिये जाते है निर्ममता से
वहाँ पेड़ बचाओ कहना बेमानी लगता है ........
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Friday, June 13, 2014

उसकी जान जाती रही है और भीड़ छटती रही

वहाँ भीड़ लगी थी कोई अधमरा पड़ा था शायद ...
उसकी जान जाती रही है और भीड़ छटती रही .....
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