उसकी जुल्फों की छाव ने किया था एहसान
नहीं तो सूरज की रोशनी मे जल गया होता चाँद.....
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नहीं तो सूरज की रोशनी मे जल गया होता चाँद.....
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होंठ जनता नहीं कि पेट भूखा है हमारा
मुस्कुरा देता है बेफिक्री में कभी कभी
और हुजूर को लगता है
कि थाली हमारी भी भरी थी कल रात को…
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