Thursday, June 12, 2014

नहीं तो सूरज की रोशनी मे जल गया होता चाँद

उसकी जुल्फों की छाव ने किया था एहसान
नहीं तो सूरज की रोशनी मे जल गया होता चाँद.....
......... Infinity

बचा लो मुझे कि मैं उत्तर प्रदेश हू

मैं ब्लाटकारियों और छद्म मनुस्यों का शेष हू
मैं घमंडी एहंकारी नेताओं का अवशेष हू
मुझे उठाओ कि तुम्हारा ही एक भेष हू
बचा लो मुझे कि मैं उत्तर प्रदेश हू
------ Infinity

Wednesday, June 11, 2014

ज़िंदगी की पतंग को हम देते रहे ढ़ील

ज़िंदगी की पतंग को हम देते रहे ढ़ील
और लोग काटते रहे ..

......Infinity

Wednesday, June 4, 2014

माँ के संभाले कंगन टूट गए पिता का मन बदनशीब हो गया कोई दरिंदा लूट गया कई सपनों को

माँ के संभाले कंगन टूट गए पिता का मन बदनशीब हो गया कोई दरिंदा लूट गया कई सपनों को 

माँ ने संभाल रक्खे थे कंगन अपनी शादी वाले
बेटी जब जाएगी ससुराल तो पहना कर भेजेगी
अपनी निशानी उसको
भाई ने जोड़ लिए तो कुछ पैसे
बहन को अपने औकात से विदा करने के लिए
पिता का मन रोज हो जाता था भावुक
की बेटी जब चली जाएगी ससुराल तो
तो कितना लगेगा सन्नाटा
भेजता था बेटी को स्कूल की
पढ़ लिख जाएगी
तो अपने पैरो पे मजबूत खड़ी हो पाएगी
पर नजर लग गई न जाने किसकी
उस पिता के सपनों पर
उस भाई के उम्मीद पर
और उस माँ की ममता पर
कल लाश मिली उसकी पेड़ पर लटकी हुई
किसी दरिंदे ने लूट ली थी उसकी आबरू
और लोग जला रहे थे मोमबत्तीय
और रहनुमान सेंक रहे थे अपनी रोटिया
पूरा परिवार उस बेटी का कमरे के अंदर बंद
समझ नहीं पा रहा था की क्या करे
क्या करने के लिए रहे इस धरती पे
और दरिंदा अपनी दरिंदगी को
गलती मान घूम रहा था काही मस्ती मे
रोटी रही माँ टूटते रहे पिता भीतर ही भीतर
भाई बाधवास घूम रहा था अपनी ख़यालो मे
अधमरा अधमरा सा ........

-------------------->Infinity

Tuesday, June 3, 2014

रफ्तार जिंदगी की कुछ यूं थी

रफ्तार जिंदगी की कुछ यूं थी
की सुबह का दर्द शाम को बेदर्द हो गया

Wednesday, March 5, 2014

बेपरवाही तेरी देखके जल जाते है ये आमेखास,

बेपरवाही तेरी देखके जल जाते है ये आमेखास,
कहाँ से पाई है ये बेफिक्री तूने
एकबार जिक्र करदे इनका बस
इस फिक्र मे है चाहे बेरुखी के दो शब्द ही सही
---------------------------------------------------->इंफीनिटी

Thursday, January 30, 2014

उधर मोमबत्तियां पिघली इधर मेरा दिल जलाता रहा

kisi insan ke seene me dil na tha
mera baccha bhooka mar gaya
mombattiyan jalti rahi
udhar mombatti pighalati rahi idhar mera dil jalata raha


किसी इंसान के सीने में दिल न था
मेरा बच्चा मर गया भूखा
मम्बत्तियां जलती रही चौराहों पे
उधर मोमबत्तियां पिघली इधर मेरा दिल जलाता रहा

Saturday, January 25, 2014

बेचते है अब भी कुछ बच्चे ट्राफिक सिग्नल पे तिरंगे

बेचते है अब भी कुछ बच्चे
ट्राफिक सिग्नल पे तिरंगे
पता नहीं आजादी के इतने सालो बाद भी
क्यू है भूखे नंगे...
----------> इन्फ़िनिटि

Wednesday, January 15, 2014

Death : The perfect

Only on thing in this world is perfect : Death, Rest is imperfect and incomplete that’s is why we move toward death continuously.
-------------> Infinity

Tuesday, January 14, 2014

होंठ जनता नहीं कि पेट भूखा है हमारा

होंठ जनता नहीं कि पेट भूखा है हमारा
मुस्कुरा देता है बेफिक्री में कभी कभी
और हुजूर को लगता है
कि थाली हमारी  भी भरी थी कल रात को…

------------------------> Infinity