Roshani dekh kar jeete the paravane jinake
Vo shamme bujh gaye andhero ke aagosh me galib
रोशनी देख कर जीते थे परवाने जिनके
वो शम्मे बुझ गए अंधेरों के आगोश में ग़ालिब....
Roshani dekh kar jeete the paravane jinake
Vo shamme bujh gaye andhero ke aagosh me galib
रोशनी देख कर जीते थे परवाने जिनके
वो शम्मे बुझ गए अंधेरों के आगोश में ग़ालिब....
Ek Kafan Sarabjeet ke liye.. jo mara desh ke bevafai se ...
aur anek kafan sarakar ke liye jo desh ko le dooba ja raha hai.....
तम्बुयें गड गई है दुश्मनों के हमारे देश में
हमारी सरकार सो रही निश्चिन्त मखमली खेश में......
मेरे सपने बहुत बड़े और बहुत छोटी थी जरूरते
छोटा था जब मै....
अब सपने बहुत छोटे और जरूरते अनगिनत है मेरे
हे मालिक बच्चा ही क्यों न रहने दिया मुझे हमेशा के लिए
Aaam aadami party Ab khas ho gai..
na rajaneeti karane ki kasm toot gai..
ab vo bhi neta ke jagah raj neta ho gaye...
देखा नहीं कभी सोचा नहीं...
कि दोस्त कितने नशे में है...
आपने नशे में ही व्यस्थ रहे हम....
जाना चाहता हूँ फिर एक बार...
जहाँ बचपन छूट गया है मेरा....
वो बदपानी कि लंबी चौड़ी झील
वो भोकिमालो का खाता पानी....
भाग के जाना जंगल में टिफिन के बीच में...
धुप के पेड़ को आग दिखा के
धुप काट के लाना
वो क्लास के लड़कियों के डेस्क से
तख्ती निकल चीड़ के फल से क्रिकेट कहलाने
कि इस जवानी के आलम ने
उस बचपन के बच्चे को न जाने कहा खो दिया...
याद आता है वो बचपन कभी कभी.....
उस रोशनदान से झाँक रहा है कोई....
शायद आज फिर किसी का घर छिन गया...
आज फिर शायद किसी की आँखे नाम है
फिर अपना किसी का छिन गया वहाँ.....
किसकी सुने और किसकी माने हम
चंद रुपये के लिए धर्म और ईमान बदल लेते है लोग.....