Sunday, April 7, 2013

Patange to udati hai kat ke chali jaati hai kahi aur

Patange to udati hai kat ke chali jaati hai kahi aur
dosti karani hai to dor se karo
ki kat ke bhi paas rah jaati hai....

किसी को फेकने से फुर्सत नहीं....

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किसी को खाने के लिए काफी नहीं है ग़ालिब
किसी को फेकने से फुर्सत नहीं....
एक इंसान कि इंसानियत
कबतक सोयेगी ....

Friday, April 5, 2013

Ek ped kat ke doosare ped ke chaaaow me

Ek ped kat ke
doosare ped ke chaaaow me baith jaate hai
ki fir teesare  ped kaat sake..
kitane vyavahari hai hum...

Sunday, March 31, 2013

इस कलम में भी स्याही है

इस कलम में भी स्याही है

स्याही ही उस कलम में भी

बस लिखा गया तो किसी

हम और आप जैसे लोगो

के मन कि भड़ास भर है...

भूखे हिंदू भी है मुसलमां भी भूख के मारे है.....

भूखे हिंदू भी है मुसलमां भी भूख के मारे है.....
कह दो राजनेताओ से..
कि राज करने कि सोच पीछे छोड़
नीति की बात करे....

उस छोटी सी बच्ची के छोटे से बस्ते में एक टूटी हुई पेन्सिल और और एक आधा स्लेट

उस छोटी सी बच्ची के छोटे से बस्ते में एक टूटी हुई पेन्सिल और और एक आधा स्लेट मन ही मन जोर जोर से कहा रहा है, मै भी पढाना चाहता हूँ डिग्री इससे पहले कि कोई शादी की डोर बाँध ले जाए मेरे सपने कही और जहाँ अस्तित्व के नाम पे सिर्फ माँ बहू बन के रह जाओ.. मै भी बनाना चाहती होऊ कल्पना चावला किरण वेदी कि अधिकार है मेरा भी कुछ और बनाने का

ये बच्चा……

Shashwat Shriparv

Saturday, March 30, 2013

जरूरते

 

बस जरूरते हमें कंजूस बना देती है ग़ालिब

वर्ना हम कहा किसी से गरीब है..