अभी गिद्ध बैठा है
आ के लाश के पास
नोचेंगा जरूर
अभी बस इंतज़ार में है
भीड़ छटने के
#Infinity
मेरी दुनिया वहीं कहीं कोने में ही पड़ी है
मेरे सपनों का मोल पैदा होने से पहले से निर्धारित थे
बिक गए कौड़ियों के भाव
अकीदतमंद है मेरी मेहनत काफिर है सपने मेरे
बस कत्ल के लायक
मेरी औकाद मेरे फाटे कपड़े की दहलीज नहीं लांघ पाती
साहेब बनाये थे ताजमहल सारी दुनिया यही कहती है।
#Infinity
बेकसूर गुनाहगार
मैं खुश हूं तो ग़म किसको है
क्यों तेरे अगोशे-शुकून का गुनाहगार हूँ मैं।
#Infinity
शुशांत शांत हो गया
लटक गया कुनबापरस्ती के रस्सी से
दोस्त थी उसकी कोई
जिसका प्यार फरेब की चाशनी में डूबा जलेबी निकाला शायद
मेधावी था शायद बुद्ध की बुद्धि थी उसमें
तभी हल्के सोंच वालो के बीच जी न पाया
बड़ा अभिनेता बनाता शायद
दिल मे छुड़ी छुपाये
बहरूपीओ के शहर को अलविदा कह चल दिया
अपने चांद पर वाली जमी पे आशियाना बनाने
शुशांत शांत हो गया।
#Infinity
मेरे रहनुमा ने निकल दिए अपने दहलीज से
मजदूर है हम गरीब
मकान बनाते है
घर पे हमारा हक नहीं।
#Infinity