Wednesday, May 15, 2013

रोशनी देख कर जीते थे परवाने जिनके

Roshani dekh kar jeete the paravane jinake
Vo shamme bujh gaye andhero ke aagosh me galib

 

रोशनी देख कर जीते थे परवाने जिनके
वो शम्मे बुझ गए अंधेरों के आगोश में ग़ालिब....