Saturday, May 23, 2026

चिड़िया को याद आते है अपने पंख



चिड़िया को याद आते है अपने पंख
जो सहेज के रक्खे है घोंसले मे
साथ लाई नहीं थी वो अपने साथ
भरोसा था उसको अपने कल पर
जो आज उसके कल की तरह माकूल नहीं है
लेकिन है उसे भारोसा
कि उसके पंख रक्खे है कहीं सुरक्षित उसके कल के साथ
करना नहीं है कुछ भी
अपने पंख उस कल से मांग लेना है फिर
अपने हक की तरह
फिर उड़ेगी चिड़िया
बस भरोसा करना है उसको खुद पर
कि फिर वो उड़ सकती है
आसमान के ऊपर ॥

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Thursday, May 2, 2024

महक उठेंगे फूलों के गंध की तरह।

जहां खोदोगे वहीं मिलेंगे हम
कहां कहां दबाओगे हमारी हस्ती को
तुम मसल भी दोगे 
तो हम महक उठेंगे फूलों के गंध की तरह।

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Thursday, April 18, 2024

समर


बच के निकल जाने से क्या कर पाओगे 
समर में उतरो, लड़ो तो ही तो योद्धा कहलाओगे
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